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केस-1
निर्माण श्रमिक लिखमाराम गांव कुडला ने अपनी दो बेटियों का आवेदन 2 मार्च 2016 को शुभशक्ति योजना में किया। आठ बार स्पष्टीकरण मांगने के बाद 21 जून 2017 को रिजेक्ट कर वापस 24 जुलाई 2018 को रिओपन कर दिया। इसके बाद पुन: स्पष्टीकरण मांगा जो 2018 से लबित है। एक आवेदन को स्वीकृत किया।
केस 2
निर्माण श्रमिक बाबूराम पुत्र गोरखाराम निवासी हाथमा की पुत्री समता का शुभ शक्ति योजना में 31 अगस्त को आवेदन किया। 21 जून 2017 को स्वीकृत किया गया। चार साल बीतने े बाद भी स्वीकृत सहायता राशि का भुगतान नहीं किया। इसी बीच बाबूलाल मेघवाल की मृत्यु हो गई।
केस-3
मेघसिंह की दो बेटियों का शुभशक्ति योजना में स्पष्टीकरण मांगा गया। इसके बाद इसका आवेदन निरस्त कर दिया गया। रिओपन के लिए अपील करने के लिए विभाग के पास पहुंचा लेकिन सुनवाई नहीं हो रही है। मेघसिंह का इंतजार भी लंबा हो रहा है।
बाड़मेर पत्रिका.
सामाजिक कल्याण की श्रमिकों के लिए बनी शुभशक्ति योजना की परतें भी उघडऩे लगी है। योजना में बाड़मेर में 12396 आवेदन लंबित पड़े है। बेटिरयो के हाथ पीले कर चुके मां-बाप को यह राशि नहीं मिलने से उनके लिए योजना सफेद हाथी साबित हुई है। विभागीय अधिकारी इतने सारे लंबित प्रकरणों के बावजूद दिलचस्पी नहीं ले रहे है।
निर्माण श्रमिकों की छात्रवृत्ति योजना में लंबित को लेकर विभाग ने जिला कलक्टर को अपना स्पष्टीकरण दे दिया लेकिन शुभशक्ति योजना का भी यही आलम है। विभागीय अधिकारियों की इस तरह योजनाओं को लंबित रखने की प्रक्रिया पर प्रशासन बड़ी कार्रवाई करने की बजाय स्पष्टीकरण पूछकर इतिश्री कर रहा है, जबकि 12 हजार से अधिक आवेदन का लंबित होना कार्य के प्रति गंभीर लापरवाही की श्रेणी में है।
चक्कर ज्यादा
श्रम कल्याण योजनाओं के बुरे हश्र ने श्रमिकों का अब सहायता से विश्वास उठा दया है। श्रमिक पंजीयन कार्ड बनाना, इसके बाद योजना के लिए ईमित्र में आवेदन करना और फिर इसकी स्वीकृति के लिए महीनों तक का इंतजार। 55000 रुपए की मदद श्रमिक को मिलती है और पांच सौ रुपए दिहाड़ी कमाने वाला मजदूर कागजों के चक्कर में अपनी कई दिन की मजदूरी से वंचित हो रहा है।
पत्रिका व्यू
श्रम कल्याण की योजनाओं को लेकर इतनी लंबित की फेहरिस्त इतनी बड़ी है, जाहिर है 17 हजार 915 में से महज 5500 के करीब को ही मदद मिली है तो शेष लोगों के लिए योजना में आवेदन अटकाने के अलावा कुछ नहीं हुआ है। सामाजिक कल्याण योजनाओं की समीक्षा इस दौरान जिला कलक्टर ने की है। प्रभारी मंत्री, सचिव, जिला परिषद की बैठकों में भी यह मुद्दा आया है और अधिकारियों ने हर बार इसमें त्वरित कार्यवाही का भरोसा दिया है तो फिर प्रशासनिक स्तर पर अब जवाबदेही तय क्यों नहीं हो रही है।
सहायता मिलनी चाहिए
ऑन लाइन प्रक्रिया के भरोसे रहने के बावजूद इसमें अब मैनुअल मॉनीटरिंग करवाकर सभी आवेदनों को ग्राम पंचायत स्तर पर पूर्ण करवाया जाए। प्रशासन गांवों के संग शिविर में ये आवेदन पूर्ण किए होते तो यह नौबत नहीं आती। इसी तर्ज पर अब कार्य की जरूरत है।- लक्ष्मण बडेरा, अध्यक्ष कमठा मजदूर युनियन

Source: Barmer News

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