जोधपुर। प्रदेश में नि:शुल्क दवाइयों का सबसे बड़ा बोझ सहकारी उपभोक्ता भण्डारों के मेडिकल स्टोर पर पड़ा है। पूरे प्रदेश में भण्डार के कमाऊपूत मेडिकल स्टोर माने जाते थे, लेकिन सरकारी अस्पतालों को उधार देते-देते इनके खजाने खाली हो गए हैं। जोधपुर सहकारी उपभोक्ता होलसेल भण्डार के डॉ. सम्पूर्णानंद मेडिकल कॉलेज के तीनों बड़े अस्पतालों मथुरादास माथुर, गांधी अस्पताल और उम्मेद अस्पताल पर 11.4 करोड़ रुपए बकाया है।
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यह राशि लम्बे समय से बकाया है। अस्पताल हर महीने लाखों रुपए की दवाइयां लेते हैं, लेकिन भुगतान औने-पौने करते हैं। हाल ही तीनों अस्पतालों की हुई मेडिकल रिलीफ सोसायटी (आरएमएस) की बैठक में संभागीय आयुक्त ने एक सप्ताह के भीतर इस भुगतान का सेटलमेंट करने के निर्देश दिए थे। प्रदेश में अक्टूबर 2011 से नि:शुल्क दवा योजना शुरू हुई थी, जिसका दायरा धीरे-धीरे बढ़ाया गया। इसी के तहत सहकारी भण्डारों ने सरकारी अस्पतालों को दवाइयों की बड़ी मात्रा में आपूर्ति शुरू की, लेकिन समय पर भुगतान नहीं होने से फ्री दवाइयों ने भण्डारों को कर्ज में डूबो दिया है। हालांकि इससे पहले भी बीपीएल मरीजों को बकाया चल रहा है।
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आरजीएचएस ने और डूबोया
सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स को कैशलेस इलाज देने के लिए नवम्बर 2021 में एक और योजना राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (आरजीएचएस) शुरू की गई। करीब डेढ़ साल में ही जोधपुर के सहकारी भण्डार पर दवाइयों के 17 करोड़ रुपए बकाया हो गए हैं। अब दवा विक्रेताओं ने दवाइयों की आपूर्ति की बंद कर दी है। राज्य सरकार भण्डार को 10 प्रतिशत कमीशन देना चाहती है, जबकि भण्डार 15 प्रतिशत पर अड़े हैं। इसी कारण पूरे प्रदेश में करीब 200 करोड़ का भुगतान अटका हुआ है।
इनका कहना है
हाल ही में हुई आरएमएस की बैठक में भण्डार के बकाया भुगतान को लेकर चर्चा की गई है। शीघ्र सेटलमेंट किया जाएगा।
दिलीप कच्छवाह, प्राचार्य, डॉ एसएन मेडिकल कॉलेज
मेडिकल कॉलेज के अस्पतालों में लम्बे समय से बकाया चल रहा है। सर्वाधिक परेशानी आरजीएचएस से हुई है।
अरुण बारहठ, महाप्रबंधक, जोधपुर सहकारी उपभोक्ता होलसेल भंडार
Source: Jodhpur