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फलोदी। हिमाच्छादित क्षेत्रों में रहने वाली कुरजां का मारवाड़ में शीतकालीन प्रवास के लिए आगमन एक पखवाड़े के बाद भी नहीं हो सका है। पक्षी विशेषज्ञ इसका प्रमुख कारण सूरज की तपिश को मान रहे है। हर साल फलोदी जिले के खीचन में 25 अगस्त तक उतरने वाली कुरजां इस बार 15 दिन गुजरने के बाद भी दस्तक नहीं दे सकी है। इसका कारण सितम्बर में पड़ रही भीषण गर्मी व तापमान का सामान्य से अधिक होना इसका कारण माना जा रहा है। बदल रही मौसम की परिस्थितियों के बीच कुरजां का इंतजार अब बढ़ने लगा है। इस बार तापमान में लगातार हो रही बढोतरी के चलते जहां मंगोलियां से अब तक एक दल ने ही उड़ान भरी है, वहीं रूस से भारत आने वाली कुरजां तापमान में गिरावट नहीं होने से अभी तक उड़ान भरने का इंतजार ही कर रही है। जिससे खीचन में शीतकालीन प्रवास पर आने वाले सायबेरियन बर्ड का इंतजार करना पड़ सकता है।

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43 डिग्री पार चल रहा पारा
पक्षी विशेषज्ञों की मानें तो सायबेरियन बर्ड के लिए भारत की आबोहवा सर्वाधिक सुरक्षित है, लेकिन यहां तापमान की अधिकता के कारण वह मंगोलिया व रशिया की ओर वापसी कर लेती है। ऐसे में अभी फलोदी सहित पश्चिमी राजस्थान में तापमान 43 डिग्री के पार पहुंच गया है, जबकि कुरजां 30 डिग्री तापमान से अधिक होने के साथ ही वापसी शुरू कर देती है, ऐसे में सितम्बर में बढ़ रहा तापमान कुरजां के आगमन के इंतजार को बढ़ा रहा है। जानकारों की माने तो दिन का तापमान 30 डिग्री व रात का 15 डिग्री से कम होने पर ही कुरजां जमीन पर उतरेगी। वर्तमान तापमान साबेरियन बर्ड के आगमन में देरी का सबसे बड़ा कारण है।

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अफगानिस्तान से आया छोटा दल
गौरतलब है कि बीकानेर के गजनेर में कुरजां का एक दल आने के कयास थे, जिसके फलोदी के खीचन पहुंचने के भी दावे थे, लेकिन यहां तापमान अधिक होने से यह दल जोधपुर के रास्ते पाली या बाड़मेर के रास्ते गुजरात की ओर चला गया। गर्मी अधिक होने से कुरजां जमीन पर नहीं उतरी। जिससे सायबेरियन बर्ड का पक्षीप्रेमियों का इंतजार पूरा नहीं हो पा रहा। विशेषज्ञों की माने तो तापमान की अधिकता के चलते कुरजां जमीन पर नहीं उतरी और जोधपुर से होकर बाड़मेर के रास्ते गुजरात की ओर जा सकती है।

इस तापमान में नहीं उतरेगी जमीन पर
सायबेरियन बर्ड के आने में इस बार देरी हो रही है, जिसका सबसे अधिक कारण मौसम व तापमान की परिस्थितयां है। तापमान जब तक कम नहीं होगा, तब तक कुरजां का खीचन व आसपास के क्षेत्र में आगमन नहीं हो पाएगा।
– डॉ. दाऊलाल बोहरा, सदस्य आईएफसीएन रिसर्च ग्रुप

Source: Jodhpur

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