बाड़मेर. नरेगा में पसीना बहाने में वृद्धजन भी पीछे नहीं है। बाड़मेर और डूंगरपुर ऐसे जिले हैं, जहां पर सर्वाधिक संख्या में 80 साल से अधिक के श्रमिक पंजीकृत है और काम भी कर रहे हैं।
मनरेगा में 80 साल से अधिक आयु के पंजीयन प्रदेश में सबसे अधिक बाड़मेर में है। जिले में कुल 40999 वृद्ध 80 वर्ष की आयु के अधिक है, जो मनरेगा में श्रमिक के रूप में पंजीबद्ध है। लेकिन डूंगरपुर काम देने के मामले में बाड़मेर को पीछे छोड़ रहा है। वहां पर 7066 बुजुर्ग श्रमिकों को काम मिला हुआ है। हालांकि वहां पर पंजीयन का आंकड़ा कम है।
सबसे ज्यादा पंजीयन बाड़मेर में
प्रदेश में सबसे अधिक पंजीयन बाड़मेर जिले में है। यहां पर वित्तीय वर्ष 2020-21 में 80 साल से अधिक आयु के वृद्ध श्रमिकों की संख्या 40999 है। इनमें से काम करने वाले केवल 5591 ही है। करीब दस फीसदी ही वृद्धों को मनरेगा में काम मिला है।
डूंगरपुर में सबसे ज्यादा नियोजित, धौलपुर सबसे कम
प्रदेश के 33 जिलों में डूंगरपुर में 7066 श्रमिक नियोजित है। वहीं यहां पर 80 साल से अधिक के श्रमिकों का पंजीयन 33897 है। जबकि धौलपुर में नियोजित की संख्या मात्र 301 श्रमिकों की है।
14 जिलों में नियोजन का आंकड़ा 1000 से कम
मनरेगा में 14 जिले ऐसे हैं, जहां पर 80 साल से अधिक आयु के श्रमिकों की संख्या सैकड़ों में ही है। यहां पर 1000 नियोजन तक कोई जिला नहीं पहुंचा। इनमें अलवर, करौली, कोटा, चितौडग़ढ़, जयपुर, जैसलमेर, जालोर, झुंझुंनू, दौसा, धौलपुर, बूंदी, भरतपुर, सिरोही व सीकर जिला शामिल है।
जिला नियोजित श्रमिक
अजमेर 1537
अलवर 486
उदयपुर 1886
करौली 634
कोटा 413
चूरू 2185
चितौडग़ढ़ 818
जयपुर 598
जैसलमेर 830
जालोर 793
जोधपुर 2275
झुंझुंनू 379
झालावाड़ 1472
टोक 1071
डूंगरपुर 7057
दौसा 707
धौलपुर 301
नागौर 2704
प्रतापगढ़ 1028
पाली 1203
बूंदी 619
बारां 1159
बाड़मेर 5591
बांसवाड़ा 3381
बीकानेर 1736
भरतपुर 396
भीलवाड़ा 3438
राजसमंद 1085
गंगानगर 3384
सवाई माधोपुर 1778
सिरोही 442
सीकर 467
हनुमानगढ़ 1521
(80 साल से अधिक)
Source: Barmer News