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जोधपुर. राज्य सरकार की ओर से शिक्षा की गुणवत्ता और नामांकन बढ़ाने के लिए कई तरह के जतन किए जाते है। साथ ही स्कूलें क्रमोन्नत कर सौगातें दी जाती हैं, लेकिन स्कूलों में शिक्षकों के पद नहीं भर विद्यार्थियों के हितों के साथ छलावा किया जा रहा है। प्रदेश में 6 हजार से अधिक राजकीय माध्यमिक व उच्च माध्यमिक स्तर की स्कूलों में कक्षा 11-12वीं के विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए अनिवार्य हिन्दी-अंग्रेजी विषय के व्याख्याता तक नहीं है।

स्टाफिंग पैटर्न से पैदा हो रहा भेदभाव
साल २०१४ में पूर्ववर्ती सरकार में स्टाफिंग पैटर्न लागू हुआ था। उस समय उच्च माध्यमिक स्कूलों में कक्षा ११-१२ में नामांकन ८० व उससे अधिक होने की दशा में अनिवार्य हिन्दी-अंग्रेजी व्याख्याता पद स्वीकृत करने का प्रावधान दिया गया। इन नियमों के तहत जिले व प्रदेश में कई स्कूल खरी नहीं उतर पा रही है। एेसे में ६०-७० के नामांकन वाले विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए योग्य व्याख्याता नहीं मिल रहे हैं। जबकि राज्य सरकार की पूर्व में हुई भर्तियों में अंग्रेजी विषय के बहुत कम पद स्वीकृत किए गए हैं। गत पांच वर्षों में जोधपुर जिले में २८६ नई ग्राम पंचायतों का गठन हुआ है। प्रत्येक ग्राम पंचायत मुख्यालय पर उच्च माध्यमिक स्तर का सरकार विद्यालय संचालित करने का मानस बना रही है। २१ पंचायत समिति मुख्यालय हैं, यहां भी अंग्रेजी पढ़ाने वाले व्याख्याताओं की भारी कमी चल रही है।
जोधपुर में हिन्दी व्याख्याता के ८९ और अंग्रेजी के ३३ पद खाली

जोधपुर जिले में हिन्दी व्याख्याता के ५५१ पद स्वीकृत हैं, इसमें ४६२ पद भरे हैं, शेष ८९ खाली है। इसी प्रकार अंग्रेजी व्याख्याताओं के १६७ ही पद स्वीकृत हैं, इनमें १३४ कार्यरत और ३३ खाली पड़े है। जबकि ग्रामीण पृष्ठ भूमि में सर्वाधिक विद्यार्थियों की अंग्रेजी कमजोर है।

Source: Jodhpur

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