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दिलीप दवे बाड़मेर. पैंतीस- सैंतीस रुपए किलो का दूध शिक्षकों के सिर पर करोड़ों की उधारी करवा चुका है। मिड डे मील प्रभारी उधार पर दूध लेकर बच्चों को पिला चुके, लेकिन सरकार से भुगतान नहीं मिला। जिले में ७ करोड़ ६८ लाख रुपए दुग्ध योजना के विद्यालयों के बकाया है।

अब दूध विक्रेता शिक्षकों के चक्कर काट रहे हैं और अध्यापक विभाग के। यह स्थिति करीब एक साल से है, लेकिन अब तक बजट आया ना ही यह आश्वासन की जल्द ही राशि आ जाएगी।

सरकारी विद्यालयों में कक्षा पहली से आठवीं तक पढऩे वाले बच्चों को मिड डे मील के साथ राज्य सरकार की ओर से दूध दिया जाता था। योजना के तहत प्रतिदिन पहली से पांचवीं के बच्चों को सौ ग्राम व छठीं से आठवीं तक के विद्यार्थियों को डेढ़ सौ ग्राम दूध मिलता था।

सरकार विद्यालयों को गांवों में प्रति लीटर पैंतीस रुपए व शहर में सैंतीस रुपए की दर से भुगतान करती थी। योजना के तहत बाड़मेर जिले में करीब ढाई लाख बच्चों को दुग्ध योजना का लाभ मिल रहा था। बजट भी अटका- कोरोना के चलते २१ मार्च के बाद विद्यालय बंद हो गए तो दुग्ध योजना भी बंद हो गई। इसके बाद अब छठीं से बारहवीं तक के विद्यार्थी स्कू ल आ रहे हैं, लेकिन मिड डे मील और दुग्ध योजना शुरू नहीं की है

। मिड डे मील के तहत सरकार घर बैठे बच्चों को पोषाहार व कोम्बो पैक भेज रही है, लेकिन दूध योजना को लेकर कुछ भी नहीं किया गया।

उधारी चुकाना हुआ मुश्किल– जिले के सरकारी विद्यालयों में मिड डे मील प्रभारियों ने उधार लेकर दूध को बच्चों को पिला दिया लेकिन भुगतान अटकते ही उनकी मुश्किलें बढ़ गई। स्थिति यह है कि कोरोनाकाल के बाद जैसे ही सरकार ने स्कू ल शुरू करने के आदेश दिए, दूध की आपूॢत करने वाले स्कू ल के चक्कर काटने लगे। अब हर स्कू ल में तीस-चालीस हजार रुपए की उधारी हो चुकी है, जिसको चुकाना शिक्षकों के लिए भारी पड़ रहा है।

नया धंधा खोला और मुसीबत आ गई- जिले में दूध योजना शुरू हुई तो कई जनों ने दूध की एजेंसी लेकर नया धंधा शुरू किया। पन्द्रह-बीस स्कू ल में दूध की आपूर्ति कर वे गुजारा कर रहे थे। समय पर भुगतान मिलने से वे खुश थे, लेकिन जैसे ही भुगतान अटका उनकी मुसीबत बढ़ गई। एक तरफ धंधा बंद हो गया तो दूसरी तरफ दूध आपूर्तिकर्ता की उधारी चुकाना मुश्किल हो गया।

सरकार करे शीघ्र भुगतान- सरकार बकाया राशि का शीघ्र भुगतान करे। दूध योजना के तहत राशि बकाया होने के कारण शिक्षकों को दिक्कत हो रही है। मार्च क्लोजिंग से पूर्व पूर्ण भुगतान होना चाहिए।- कांतिलाल व्यास, जिलाध्यक्ष शिक्षक संघ राष्ट्रीय बालोतरा

प्रस्ताव बना कर भेजा- हमने जिले में दुग्ध योजना के तहत बकाया भुगतान के बजट का प्रस्ताव बना कर सरकार को भेजा है। जैसे ही बजट आता है तुरंत भुगतान की व्यवस्था की जाएगी।- मूलाराम चौधरी, मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी प्राथमिक शिक्षा बाड़मेर

Source: Barmer News

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