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E-gaming: अविनाश केवलिया/जोधपुर. कोरोना के लॉकडाउन पीरियड में लोग घर पर रहे। ऐसे में आउटडोर की बजाय मोबाइल पर स्क्रीन टाइम बढ़ गया। इसी का नतीजा है कि स्क्रीन पर मोबाइल गेम खेलना भी बढ़ गया। कोरोना काल के बाद ई-गेमिंग इंडस्ट्री का कारोबार भी देश में दोगुना बढ़ा है और आने वाले तीन साल में इसके तीन गुना तक बढ़ने के आसार है। खास बात यह है कि यह ऑनलाइन गेम्स के टूर्नामेंट और स्ट्रीमिंग से भी यूथ पैसे कमा रहा है।

कुछ ऐसा है ट्रेंड
– पबजी के अधिकारिक तौर पर बंद होने के बाद भी चोरी-छुपे इसका उपयोग जारी है।
– पबजी का सबसे बड़ा विकल्प बैटल ग्राउंड मोबाइल इंडिया (बीजीएमआई) बना है।
– डोटा और फोर्टनाइट भी यूथ में काफी लोकप्रिय है।
– ग्रुप गेम्स में फीफा व आइपीएल की तर्ज पर क्रिकेट भी पसंद किया जाता है।

नियामक की जरूरत
ई-गेमिंग इंडस्ट्री पर अभी कोई नियामक नहीं है। ऐसे में कई हिंसा को बढ़ावा देने वाले गेम्स ज्यादा लोकप्रिय हो रहे हैं। इसका नकारात्मक प्रभाव भी पड़ रहा है। साथ ही कई घंटों तक ई-गेम्स खेलने का शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर पड़ रहा है। ई-गेम्स खेलने के साथ सोशल मीडिया पर लाइव स्ट्रीमिंग भी यूथ को काफी पसंद आ रहा है। ई-स्पोर्टस स्ट्रीमिंग के व्यू भी लाखों में आ रहे हैं।

यह कहता है फिक्की
फेडरेशन ऑफ इंडियन चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (फिक्की) की एक रिपोर्ट बताती है कि वर्ष 2020 के मुकाबले 2021 में ई-स्पोर्टस का काराेबार दोगुना हो गया है। वित्तीय वर्ष 2021 की समाप्ति पर 100 करोड़ का यह कारोबार था। फिक्की के अनुमान के मुताबिक यह 2025 तक तीन से चार गुना तक बढ़ेगा।

गेमिंग कैफे व ई-गेम्स टूर्नामेंट
कोरोना के बाद जो सबसे बड़ा बदलावा देखने को मिला वह गेमिंग कैफे व ई-गेम्स टूर्नामेंट है। जोधपुर में ऐसे ही एक ई-गेमिंग कैफे संचालक हरीश चौधरी बताते हैं कि मोबाइल गेम्स व पैनल बोर्ड के गेम्स का अलग-अलग क्रेज है। कई ग्रुप में टूर्नामेंट भी चलता रहता है। रुद्रा जैन बताते हैं कि गेमिंग के प्रति यूथ का क्रेज ऐसा है कि एक घंटे से चार घंटे तक प्रति दिन का इसमें समय देते हैं।

Source: Jodhpur

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